बाबुजी

किछु अहि तरहेँ हमरा सभके पालैत रहलैथ बाबुजी अपन मोनक इक्षा सभके मारैत रहलैथ बाबुजी अहि कारण की हमरा सभके पाएर में नईँ काँट गड़ए आगाँ आगाँ रास्ता सभके बहारैत रहलैथ बाबुजी हमरा सभके नवका कपड़ा अपने पुरने धोती में अहिना दशमी दिवाली होली मनावैत रहलैथ बाबुजी मोन परैत अछि दादी के जे एकबेर पाएर…